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Story of Tommy

Tommy looked at her with very superior eyes. Because it's not our kind of school, stupid. This is the old kinTommy looked at her with very superior eyes. Because it's not our kind of school, stupid. This is the old kind of school that they had hundreds and hundreds of years ago." He added loftily, pronouncing the word carefully, "Centuries ago."

Margie was hurt. "Well, I don't know what kind of school they had all that time ago." She read the book over his shoulder for a while, then said, "Anyway, they had a teacher." 

"Sure they had a teacher, but it wasn't a regular teacher. It was a man."

"A man? How could a man be a teacher?"

"Well, he just told the boys and girls things and gave them homework and asked them questions."

(टॉमी ने उसे अच्छी निगाहों से देखा। "क्योंकि यह हमारे स्कूल जैसा नहीं है, बेवकूफ। यह पुराने ज़माने का स्कूल है जो कई सौ साल पहले हुआ करता था।" उसने अच्छे से उस शब्द का दोबारा उच्चारण किया "शताब्दियों पहले।"

मार्गी को बुरा लगा। "खैर, मुझे मालूम नहीं कि उस वक्त उनके स्कूल किस प्रकार के होते थे।" उसने उसके कंधे से ऊपर झांककर कुछ देर तक किताब को पढ़ा, फिर कहा, "वैसे उनके एक शिक्षक थे।"

"बिलकुल उनके शिक्षक थे, लेकिन वो नियमित शिक्षक नहीं थे। वह एक इंसान थे।"

"एक इंसान? एक इंसान कैसे शिक्षक हो सकता है?"

"वाकई, वह सिर्फ लड़के और लड़कियों को चीज़ों के बारे में बताते थे और उन्हें घर का काम देते थे और उनसे सवाल पूछा करते थे।")

 

"A man isn't smart enough."

"Sure he is. My father knows as much as my teacher."

"He knows almost as much, I betcha."

Margie wasn't prepared to dispute that. She said, "I wouldn't want a strange man in my house to teach me."

Tommy screamed with laughter. "You don't know much, Margie. The teachers didn't live in the house. They had a special building and all the kids went there."

"And all the kids learned the same thing."

"Sure, if they were the same age."

(एक इंसान काफी होशियार नहीं हो सकता।"

"निश्चित ही वह हो सकता है। मेरे पापाजी को उतना ही पता है, जितना मेरे शिक्षक को।"

"वह लगभग सब कुछ जानते हैं, मैं शर्त लगाता हूं।"

मार्गी इस बात पर लड़ाई करने को तैयार नहीं थी। उसने कहा, "मुझे अपने घर पर एक अजनबी इंसान नहीं चाहिए जो मुझे पढ़ा और सिखा सके।"

टॉमी ज़ोर से हंसा। "तुम कुछ नहीं जानती, मार्गी। शिक्षक घरों पर नहीं रहते थे। उनकी एक खास इमारत होती थी और सभी बच्चे वहां जाते थे।"

"और सभी बच्चे एक ही चीज़ पढ़ते थे।"

"पक्के तौर पर, अगर वह एक ही आयु के होते थे।")

 

"But my mother says a teacher has to be adjusted to fit the mind of each boy and girl it teaches and that each kid has to be taught differently."

"Just the same they didn't do it that way then. If you don't like it, you don't have to read the book."

"I didn't say I didn't like it." Margie said quickly. She wanted to read about those funny schools.

They weren't even half finished when Margie's mother called, "Margie! School!"

Margie looked up. "Not yet, Mamma."

"Now! said Mrs. Jones. "And it's probably time for Tommy, too."

Margie said to Tommy, "Can I read the book some more with you after school.?"

("लेकिन मेरी मम्मी कहती हैं कि एक शिक्षक को हर एक बच्चे के दिमाग के अनुसार, जिनको वह शिक्षा देता है, पढ़ाना पड़ता है और हर एक बच्चा अलग अलग तरीक़े से पढ़ता है।"

"इस तरह से तब नहीं होता था जैसा अब होता है। अगर आपको यह पसंद नहीं, तो आप किताब मत पढ़ो।"

"मैंने यह नहीं कहा कि मुझे यह पसंद नहीं है", मार्गी ने एकदम से कहा। वह उन फनी स्कूलों के बारे में पढ़ना चाहती थी।

उन्होंने आधा भी नहीं पढ़ा था जब मार्गी की मम्मी ने आवाज़ दी, "मार्गी! स्कूल!"

मार्गी ने ऊपर देखा। "अभी नहीं मम्मी।"

"अभी!" श्रीमती जॉन्स ने कहा। और शायद टॉमी का भी यही वक्त है।"

मार्गी ने टॉमी से कहा, "क्या मैं आपके साथ स्कूल के बाद थोड़ी और किताब पढ़ सकती हूं?")

 

"May be," he said nonchalantly. He walked away whisteling, the dusty old book tucked beneath his arm.

("हो सकता है", उसने बेपरवाह कहा। वह सीटी बजाता हुआ, धूल भरी पुरानी किताब को अपनी भुजा के नीचे दबाए हुए चला गया।)

 

Margie went into the schoolroom. It was right next to her bedroom, and the mechanical teacher was on and waiting for her. It was always on at the same time every day except Saturday and Sunday, because her mother said little girls learned better if they learned at regular hours.

(मार्गी स्कूल के कमरे में चली गई। वह बिल्कुल उसके बेडरूम के बराबर में था, और यांत्रिक शिक्षक वहीं पर इंतज़ार कर रहा था। वह हमेशा हफ्ते और इतवार को छोड़कर, उसी वक्त खुल जाता था, क्योंकि उसकी मां ने कहा था, छोटी लड़कियां अच्छा सीखती हैं अगर वो नियमित रूप से पढ़ें।)

 

The screen was lit up, and it said: "Today's arithmetic lesson is on the addition of proper fractions. Please insert yesterday's homework in the proper slot."

(परदे पर रोशनी हुई और उसने कहा, "आज का गणित का सबक सम विभाग के जोड़ने पर आधारित है। मेहरबानी करके खाली जगह पर कल का घर का काम सही जगह पर डालें।)

 

Margie did so with a sigh. She was thinking about the old schools they had when her grandfather's grandfather was a little boy. All the kids from the whole neighbourhood came, laughing and shouting in the school yard, sitting together in the schoolroom, going home together at the end of the day. They learned at the same things, so they could help one another with the homework and talk about it.

(मार्गी ने आह भरते हुए वैसा ही किया। वह उन पुराने स्कूलों के विषय के बारे में सोच कर रही थी जब उसके दादा के दादा छोटे हुआ करते थे। सभी आस पड़ोस के बच्चे हंसते चिल्लाते हुए स्कूल के आंगन में आते, एक साथ क्लास में बैठते और दिन के आखिर में एक साथ घर जाते। वह एक जैसा पढ़ते थे, इसलिए वो एक दूसरे की सहायता घर के काम करने में करते थे और आपस में चर्चा करते थे।)

And the teachers were people.......

(और शिक्षक इंसान होते थे....)

The mechanical teacher was flashing on the screen: "When we add fractions 1/2 and 1/4...."

(यांत्रिक शिक्षक का परदा चमकने लगा था, "जब हम भिन्नो को जोड़ते हैं 1/2 और 1/4......"

 

Margie was thinking about how the kids must have loved it in the old days. She was thinking about the fun they had.

(मार्गी इस बारे में भी सोच रही थी कि किस तरह बच्चे पुराने स्कूलों को पसंद करते होंगे। वह सोच रही थी कि उन बच्चों को कितना अच्छा लगता होगा, कितना मज़ा आता होगा।)

 

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कौआ की कहानी

Moral Story in Hindi 

 

किसी जंगल में एक सयाना कव्वा रहता था, 

 

कव्वा बहुत खुशहाल जिंदगी गुज़ार रहा था, बगैर किसी परवाह के वो पूरा दिन घूमता रहता और तरह तरह के खाने पीने का लुत्फ उठाता, अंधेरा होते ही किसी खुशबूदार पेड़ पर रात गुजारता, जिंदगी के हसीन दिन गुजारते गुजारते एक दिन जब उसकी एक हंस से मुलाकात हुई तो इस मुलाकात के बाद वह परेशान रहने लगा,

 

दरअसल उसकी परेशानी की वजह ये फिक्र थी जो उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी के,

 

"हंस इतना सफेद और मैं इतना काला, ये हंस दुनिया का सबसे खुश परिंदा होगा "

 

कव्वे ने अपने ख्यालात हंस को बताए, हंस ने कहा, "असल में मुझे लगता था मैं सब से ज्यादा खुश हूं जबतक मैने तोता नहीं देखा था, तोते के पास दो अलग अलग रंग हैं, अब मैं सोचता हूं तोता सबसे ज्यादा खुश होगा "

 

कव्वा तोते के पास पहुंचा, तोते ने कौवे को बताया , "मैं बहुत खुश जिंदगी गुजार रहा था, फिर मैंने मोर देखा, मेरे पास तो सिर्फ दो रंग हैं जबकि मोर के पास कितने ही रंग हैं"

 

कव्वा मोर से मिलने चिड़ियाघर जा पहुंचा, वहां कव्वें ने देखा के सैंकड़ों लोग मोर को देखने आए हैं, लोगों के रवाना होने के बाद कौवा मोर के करीब गया, कौवे ने कहा, "प्यारे मोर !! तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हें देखने हजारों लोग आते हैं, मुझे लगता है तुम दुनिया में सबसे ज्यादा खुश रहने वाले परिंदे हो"

 

मोर ने जवाब दिया, "मैं भी सोचता था कि मैं सबसे खूबसूरत और खुश परिंदा हूं लेकिन मैं अपनी खूबसूरती की वजह से मैं चिड़ियाघर में कैद हूं, मैंने चिड़ियाघर में काफी गौर किया और मुझे अंदाजा हुआ के सिर्फ कव्वा वह अकेला परिंदा है जो चिड़ियाघर के किसी पिंजरे में कैद नहीं, पिछले कुछ दिनों से मुझे लगता है कि अगर मैं कव्वा होता तो आजाद होता "

 

अगर हम सोचें और जायज़ा लें तो हम में से कुछ इंसान भी ऐसे ही जिंदगी गुजार देते हैं, जिंदगी का मवाज़ाना करते करते नाशुक्री करने लग जाते हैं।

 

जो अल्लाह में दिया होता है उससे भी लुत्फ हासिल नहीं कर पाते, अपने पास दस रुपए होते हैं लेकिन दूसरों के सौ पर नज़र रखने की वजह से बेचैन जिंदगी गुज़ार रहे होते हैं,

 

अल्लाह ने इंसान को बेशुमार नेमतों से नवाजा है लेकिन इंसान फिर भी नाशुक्रा है, अपने से ज्यादा वाले से मवाजाना कर एहसास कमतरी में अपने को मुब्तिला करता है।

 

बराबरी करना ही हो तो अपने से कमतर से कीजिए और फिर अल्लाह का शुक्र कीजिए जिसने इस कद्र नेमतों से नवाजा है।

 
 

Chand kabil e islaah masail

چند قابلِ اصلاح مسائل 

 

      از عبید الرحمن ناظم جویا 

        ١١ ذوالحجہ ١٤٤٣ھ

 

ایمانی غیرت وحمیت وہ چیز ہے جس کو حاصل کرنے کے لیے باضابطہ محنت کرنی پڑتی ہے، جس طرح یہ ضروری نہیں کہ ظاہری متبع یا طاعت گزار کے اندر غیرتِ ایمانی ہو، اِسی طرح یہ بھی ضروری نہیں کہ طاعت وانقیاد سے دورشخص غیرتِ ایمانی سے محروم ہو، جب کہ ہم بعض معاملات میں محض مسلمان کہلانے والوں کو سبقت کرنے والا پاتے ہیں، اِس کے برخلاف خاص لوگ بل کہ بعض علماء بسااوقات ایسی بات کہہ جاتے ہیں کہ اگر دقیق نظر سے غور کیا جائے تو یقیناً قائل کے ایمان پر آنچ آسکتی ہے۔

ذیل میں آنے والی گفتگو کی بنیاد کوئی ذاتی عداوت یا کسی طرح کی مخالفت نہیں ہے، بلکہ اِس تحریر کی بنیاد محترم کی گفتگو سننے کے بعد ذہن ودماغ میں رُک رُک کر آنے والی یہ آیات واحادیث ہیں .......جن میں سے چند یہ ہیں، ارشاد باری ہے وَلْتَكُنْ مِنْكُمْ أُمَّةٌ يَدْعُونَ إِلَى الْخَيْرِ وَيَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنْكَرِ وَأُولَئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ﴾ [آل عمران: 104]

اور حضور اکرم صلی اللہ علیہ وسلم نے ارشاد فرمایا : وقال صلى الله عليه وآله وسلم: من رأى منكم منكرا فليغيره بيده فإن لم يستطع فلبسانه فإن لم يستطع فبقلبه وذلك أضعف الإيمان (رواه مسلم) 

یہ اور اس طرح کی بے شمار آیات واحادیث کی روشنی میں ہماری ذمہ داری ہے کہ ہم غلط بیانی کرنے والوں کی غلط بات کی مذمت کرتے ہوئے دلائل کی روشنی میں اُس کا رد کریں نیز اِس طرح کی سطحی اور غیر شرعی باتیں کرنے والوں سے گزارش ہے؛ خدارا محض لوگوں کی واہ واہی کی خاطر یا اپنی حیثیت منوانے کے لیے ایسی باتیں نہ کیجئے جس کی وجہ سے دنیا و آخرت میں آپ کے لیے جواب دہی مشکل ہوجائے ۔

آج کے بیان میں درج ذیل باتیں لائقِ مذمت ہیں:

(1) محترم نے فرمایا : خدا کی قسم (دو دفعہ خدا کی قسم کھائی) ان کی گائے کے ذریعہ کی گئی قربانی اللہ کے یہاں مقبول نہیں ہوگی بلکہ چوری کا گناہ اُن کو ملے گا،( گناہ اس عمل پر ملتا ہے جو حرام یا ناجائز ہو، اور چوری تو خود گناہ کبیرہ ہےگویا دبے لفظوں میں حرام کہہ دیا گیا) مثال پیش کی کہ جیسے اولاد باپ کا مال چوری کرلے تو وہ چوری ہی مانا جائے گا،( ایسے ہی حکومت کی چوری سے کسی جانور کا ذبح کرنا چوری مانا جائے گا) ۔

تبصرہ : 

اول تو یہ کہ گائے کی حلت قرآن میں منصوص ہے، لہذا اس کو چوری سے( یعنی ظالموں سے چھپاکر) ذبح کرنا کسی بھی طرح غیر مقبول قرار نہیں دیا جاسکتا، اور محترم نے چھپ کر ذبح کرنے کو عام چوری کے مشابہ قرار دے کر ناجائز کہنے کی کوشش کی بلکہ محترم کے اندازِ بیان پر غور کیا جائے تو حرام سے کم قرار دینے کو وہ تیار نہیں تھے، جیساکہ اُن کے ذریعے دی گئی چوری کی مثال سے مترشح ہوتا ہے، گو انہوں نے صراحۃً حرام کہا نہیں، قران میں اللہ تعالیٰ نے آیت يا أيها الذين آمنوا لا تحرموا طيبات ما احل الله (سورة المائدة ٨٧ 

(ترجمہ : اے ایمان والو! اللہ کی طرف سے حلال کی ہوئی چیزوں کو حرام قرار نہ دو ) کے ذریعہ اس بات کی سختی سے ممانعت فرمائی ہے۔

اِس پر حضرت تھانویؒ نے کتنی پیاری بات بیان فرمائی کہ: اس خیال سے شعائرِ اسلام اور ذبح کو خود بھی ترک کرنا نیز دوسروں کو بھی ترک کی ترغیب دلانا کہ مخالفین اسلام خوش رہیں یہ مدارات ناجائز اور مداہنت فی الدین ہے، ہماری شریعت مطہرہ نے اس کی ہرگز اجازت نہیں دی ہے، يحلفون بالله لكم ليرضوكم میں اس بات کی صراحت ہے کہ جب مسلمانوں کو خوش کرکے اللہ کو ناراض کرنا موجبِ عتاب ہے ،تو اللہ ورسول کو ناراض کرکے کافروں کو راضی کس طرح موجبِ عتاب نہ ہوگا۔ 

(٢) عید کی نماز مسجد میں پڑھنے والے خدا کی قسم گناہ گار ہوں گے، کیونکہ وہ سنت کے ترک کے مرتکب ہیں، عیدین کی نماز مسجد میں تو بوڑھوں اور کمزوروں کے لیے رکھی گئی ہے۔

تبصرہ : عیدین کی نماز عید گاہ پر مسنون ہونے کی وجہ سے اولی ہے، مسجد میں نماز پڑھنا خلافِ سنت ہونے کی وجہ سے مکروہ ہے، عید کی نماز عید گاہ میں پڑھنا فرض، واجب یا سنت مؤکدہ ہو یا مسجد میں عید کی نماز ادا کرنا حرام یا مکروہ تحریمی ہو، اِس کی صراحت کتبِ فقہ میں مجھے نہیں ملی، لہذا عید کی نماز مسجد میں ادا کرنے والوں کو شدت سے سخت کلمات کہنا یہ بالکل نامناسب ہے، خاص طور پر اُس وقت جب کہ مسجد میں عید کی نماز کی ترتیب علماء نے بنائی ہو، نیز مساجد میں عید کی نماز کی حکمت یہ ہے کہ قربانی جلدی شروع ہوجاتی ہے، جس بنا پر عید الاضحٰی کے دن افطار گوشت سے ممکن ہوجاتا ہے، یاد رکھنا چاہیے؛ بسااوقات حکمت کی وجہ سے بعض سنن میں نرمی اپنالی جاتی ہے اگر اُن کے ترک پر وعید وارد نہ ہو اور ابتلاء عام کا اندیشہ نہ ہو، ہمارے یہاں الحمد للہ نمازِ عید مسجد میں ادا کرنے میں ابتلاء عام نہیں ہے۔

(3) اے اللہ یہ جو حکومت نے قانون بنائے ہیں، ہمارے فائدے کے لئے بنائے ہیں، اس بات پر ہمیں یقین نصیب فرما، اے اللہ یہ ایس پی کوتوال وغیرہ وغیرہ لوگ ہماری حفاظت کے لئے کھڑے ہیں، بے چارے کتنی مشقت سے ڈیوٹی انجام دے رہے ہیں، رات دن ہماری آسانی کے لئے تعینات ہیں، اِن کی اِس قربانی کو قبول فرما ۔

تبصرہ : کسی کافر کے لیے ہدایت کی دعا تو کرنی چاہیے، لیکن اُن کے عمل کی مقبولیت کی دعا کرنا سمجھ میں نہیں آتا، کیوں کہ کوئی بھی عمل ایمان کے ساتھ مقبول ہے ورنہ نہیں۔

 حکومت کے قوانین مسلمانوں کے لیے کتنے فائدہ مند ہیں؟ سب جانتے ہیں، اور یہ.... دن رات جاگ کر ہماری خدمت میں لگنے والے کتنے ہمارے محسن ہیں؟ یہ بھی سب جانتے ہیں، اِن کے عمل کو اِس طرح سراہنا یہ بہت ہی نامناسب عمل ہے، بل کہ تذکرہ کی ہی ضرورت کیا پڑی ہے۔

آخری بات : مقام جتنا بلند ہوتا ہے اتنی ہی ذمہ داری عائد ہوتی ہے، لہذا بیان کرنے سے پہلے کثرتِ مطالعہ، عمدہ مواد اور اچھے انداز کی ضرورت ہوتی ہے، اس کے لیے معتبر کتابوں کا مطالعہ کرنا چاہیے، اور بہت غور وفکر کے مواد جمع کرکے گفتگو کرنی چاہیے اللہ ہمارا اور آپ کا حامی وناصر ہو۔

 
 

Naseehat aur hikmat / ALLAH walo ko stories

*نصیحت وحکمت*

 

بہلول نے حضرت جنيد بغدادی سےپوچھا شیخ صاحب کھانے کے آداب جانتے ہیں؟ 

کہنے لگے، بسم اللہ کہنا، اپنے سامنے سے کھانا، لقمہ چھوٹا لینا، سیدھے ہاتھ سے کھانا، خوب چبا کر کھانا، دوسرے کے لقمہ پر نظر نہ کرنا، اللہ کا ذکر کرنا، الحمدللہ کہنا، اول و آخر ہاتھ دھونا۔ 

 

بہلول نے کہا، لوگوں کے مرشد ہو اور کھانے کے آداب نہیں جانتے اپنے دامن کو جھاڑا اور وہا ں سے اٹھ کر آگے چل دیئے۔ 

شیخ صاحب بھی پیچھے چل دیئے، مریدوں نے اصرار کیا، سرکار وہ دیوانہ ہے لیکن شیخ صاحب پھر وہاں پہنچے پھر سلام کیا۔ 

 

بہلول نے سلام کا جواب دیا اور پھر پوچھا کون ہو؟ کہا جنید بغدادی جو کھانے کے آداب نہیں جانتا۔ بہلول نے پوچھا اچھا بولنے کے آداب تو جانتے ہوں گے۔ 

 

جی الحمدللہ، متکلم مخاطب کے مطابق بولے، بےموقعہ، بے محل اور بےحساب نہ بولے، ظاہر و باطن کا خیال رکھے۔ بہلول نے کہا کھانا تو کھانا، آپ بولنے کے آداب بھی نہیں جانتے، بہلول نے پھر دامن جھاڑا اورتھوڑا سا اور آگے چل کر بیٹھ گئے۔

 

شیخ صاحب پھر وہاں جا پہنچے سلام کیا۔ 

بہلول نے سلام کا جواب دیا، پھر وہی سوال کیا کون ہو؟ 

شیخ صاحب نے کہا، جنید بغدادی جو کھانے اور بولنے کے آداب نہیں جانتا۔ بہلول نے اچھا سونے کے آداب ہی بتا دیں؟ 

کہا نماز عشاء کے بعد، ذکر و تسبیح، سورہ اور وہ سارے آداب بتا دیئے جو روایات میں ذکر ہوئے ہیں۔ بہلول نے کہا آپ یہ بھی نہیں جانتے، اٹھ کر آگے چلنا ہی چاہتے تھے کہ شیخ صاحب نے دامن پکڑ لیا اور کہا جب میں نہیں جانتا تو بتانا آپ پر واجب ہے۔ 

 

بہلول نے کہا جو آداب آپ بتا رہے ہيں وہ فرع ہیں اور اصل کچھ اور ہے، اصل یہ ہے کہ جو کھا رہے ہیں وہ حلال ہے یا حرام، لقمہ حرام کو جتنا بھی آداب سے کھاؤ گے وہ دل میں تاریکی ہی لائےگا نور و ہدایت نہیں، شیخ صاحب نے کہا جزاک اللہ۔ 

 

بہلول نے کہا کلام میں اصل یہ ہے کہ جو بولو اللہ کی رضا و خوشنودی کیلئے بولو اگر کسی دنیاوی غرض کیلئے بولو گے یا بیھودہ بول بولو گے تو وہ وبال جان بن جائے گا۔ 

 

سونے میں اصل یہ ہے کہ دیکھو دل میں کسی مؤمن یا مسلمان کا بغض لیکر یا حسد و کینہ لیکر تو نہیں سو رہے، دنیا کی محبت، مال کی فکر میں تو نہیں سو رہے،کسی کا حق گردن پر لیکر تو نہيں سو رہے...!

 
 

UP TGT English exam preparation / UP TGT English Exam Kab Hoga

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✍ 100 Important Books & Authors

 

1):- David Copperfield → Charles Dickens

 

2):- Hamlet → William Shakespeare

 

3):- The Rime of the Ancient Mariner → Samuel Taylor Coleridge

 

4):- Das Capital → Karl Mark

 

5):- Animal Farm → George Orwell 

 

6):- Dialogues → Plato

 

7):- Tempest → William Shakespeare

 

8):- Main Kemp → Ad loaf Hitler

 

9):- Mother → Maxim Gorky

 

10):- As You Like it → William Shakespeare

 

11):- Paradise Lost → John Milton

 

12):- The Tale of Two Cities → Charles Dickens

 

13):- The Merchant of Venice → William Shakespeare

 

14):- Pride and Prejudice → Jane Austen

 

15):- All’s Well that Ends Well → William Shakespeare

 

16):- Anna Karenina → Leo Tolstoy

 

17):- Origin of Species → Charles Darwin

 

18):- Discovery of India → Jawahar Lal Nehru

 

19):- Asian Drama → Gunner Myrdal

 

20):- The Old Man and The Sea → Earnest Hemingway

 

21):- Julius Caesar → William Shakespeare

 

22):- Man and Superman → George Bernard Shaw

 

23):- War and Peace → Leo Tolstoy

 

24):- Gulliver’s Travels → Jonathan Swift

 

25):- Heaven and Earth → Lord Byron

 

26):- Blue Bird → Lord Alfred Tennyson

 

27):- Othello → William Shakespeare

 

28):- India Wins Freedom → Abul Kalam Azad

 

29):- Marriage and Moral → Bertrand Russell

 

30):- God of the Small Things → Arundhuty Roy

 

31):- Caesar and Cleopatra → George Bernard

 

32):- Romeo and Juliet → William Shakespeare

 

33):- Jungle Book → Rudyard Kipling

 

34):- Lycidas → John Milton

 

35):- Emma → Jane Austen

 

36):- A pair of Blue Eyes → Thomas Hardy

 

37):- Odyssey → Homer

 

38):- Memories of the Second World War → Winston Churchill

 

39):- For Whom the Bell Tolls → Earnest Hemingway

 

40):- Wealth of Nations → Adam Smith

 

41):- West Land → T.S Eliot

 

42):- Vanity Fair → W.M Thackeray

 

43):- Prince → Machiavelli

 

44):- Republic → Plato 

45):- Freedom → Bertrand Russell

 

46):- A Long Walk to Freedom → Nelson Mandela

 

47):- Robinson Crusoe → Daniel Defoe

 

48):- Sons and Lovers, The Rainbow → D.H Lawrence

 

49):- Ulysses → Lord Alfred Tennyson

 

50):- Sense and Sensibility → Jane Austen

 

51):- Roots → Alex Haley

 

52):- To Skylark → P. B Shelly

 

53):- Time Machine → H. W Wells

 

54):- Try and Try Again → W.E Hick son

 

55):- Seven Seas → Rudyard Kipling

 

56):- Around the World in Eighty Days→ Jules Verne

 

57):- Waiting For Goddot → Samuel Becket

 

58):- Things Fall Apart → Chinua Achebe

 

59):- Silent Women → Ben Johnson

 

60):- Wuthering Heights → Emile Bronte

 

61):- The Way of the World → William Congreve

 

62):- Voyage of Lilliput → Jonathon Swift

 

63):- Top Secret → Henry Fielding

 

64):- Twelfth Night → William Shakespeare

 

65):- Utopia → Sir Thomas Moore

 

66):- Tom Jones → Henry Fielding

 

67):- The Return of the Native → Thomas Hardy

 

68):- The Alchemist → Ben Jonson

 

69):- Tess of t D’Urbervilles → Thomas Hardy

 

70):- Scholar Gipsy → Matthew Arnold

 

71):- The Rape of the Lock → Alexander Pope

 

72):- Prelude → William Wordsworth

 

73):- Ode to the West Wind → P.B Shelly

 

74):- Great Expectations → Charles Dickens

 

75):- King Lear → William Shakespeare

 

76):- Kublai Khan → Samuel Taylor Coleridge

 

77):- Isabella → John Keats

 

78):- Measure and Measure → William Shakespeare

 

79):-In Memoriam → Lord Alfred Tennyson

 

80):- Pilgrim’s Progress → John Bunyan

 

81):- Oliver Twist → Charles Dickens

 

82):- Paradise Regained → John Milton

 

83):- Iliad → Homer

 

84):- Divine Comedy → Dante

 

85):- Crime and Punishment → Dostoevsky

86):- A Brief History Of Time → Stephen Hawking

 

87):- A Farewell to Arms → Earnest Hemingway

 

88):- A Midsummer’s Nights Dream → William

Shakespeare

89):- Adonis → P. B Shelly

 

90):- Akbar Nama → Abul Fazal

 

91):- Canterbury Tales → Geoffrey Chaucer

 

92):- Comedy of Errors → William Shakespeare

93):- Don Juan → Lord Byron

 

94):- Dr. Faustus → Christopher Marlowe

 

95):- Politics → Aristotle

 

96):- Volpone → Ben Jonson

 

97):- Dictionary → Samuel Johnson

 

98):- A Passage to India → E. M. Forster

 

99):- Macbeth → William Shakespeare

 

100):- Samson Agonists → John Milton

 
 

Kerala ke shihab Jo Hajj ke liye paidal nikle

केरल के शिहाब हज के लिए निकले पैदल

पैदल हज करने वाले शिहाब 

 

*हज के लिए पैदल निकला केरल का शिहाब*

*21वी सदी का पहला पैदल हजयात्री* 🕋

✍️ *जावेद शाह खजराना (लेखक)*

 

*अल्लाह का घर देखने की तमन्ना हर मुसलमान की होती हैं। लेकिन हजारों किलोमीटर पैदल चलकर हज पर जाना हर किसी के बस की बात नहीं।*

 

*लेकिन जब इरादे मजबूत हो तो मंजिल भी आसान हो जाती है। ऐसा ही नेक और मजबूत इरादा लेकर हज के लिए निकले है केरल के शिहाब छोत्तूर*

 

*शिहाब पर ये शे'र बिल्कुल फिट बैठता है* 👇

 

*ख़ुद ही को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले* 

*ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है?* 🕋

 

*शिहाब की रजा (मर्जी) और जिद अल्लाह का घर पैदल जाकर देखने की है।* 🕋

 

*हिंदुस्तान के आखरी छोर केरल के मलप्पुरम जिले के कोट्टक्कल के पास अठावनाड नामक इलाका है।*

*यही के रहने वाले है शिहाब ।शिहाब जोखिम और तकलीफों से भरे लेकिन इस रूहानी सफर पर ऐसे दौर में निकले हैं जब सारी दुनिया में आपाधापी मची है। आज के दौर में पैदल हज यात्रा करना लगभग ना-मुमकिन सा है।*

 

*फिर भी केरल के शिहाब छोत्तूर अल्लाह के घर को देखने के लिए पैदल-पैदल मक्का पहुंचने के लिए निकल पड़े है। वो अकेले ही पैदल चलकर 8,600 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करेंगे।* 

 

*शिहाब केरल से चलकर राजस्थान के रास्ते परदेस में दाखिल होंगे।*

*भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों का सफर तय करते हुए शिहाब 8 महीने बाद अगले साल तक मक्का पहुंच जाएंगे।*

 

*शिहाब एक साल से हज पर जाने की तैयारी में जुटे हुए थे। शिहाब का कहना है मेरा सफर रूहानी है जिसमें मेरा मक़सद पैदल हज करने का है । किसी ने मेरी कोई मदद नहीं की है।*

 

*“मुझे सलाह देने वाला भी कोई नहीं मिला। हमने केवल लोगों के पैदल मक्का जाने के बारे में सुना था। लेकिन इस जमाने में हिंदुस्तान में शायद ही कोई जिंदा इंसान मिले जो यहां से पैदल हज करने का अनुभव बता सके ।*" *ऐसा शिहाब का कहना है।*

 

*बेशक* 

*हजरत आदम अलैहिस्सलाम ने हिंदुस्तान से कई मर्तबा पैदल चलकर हज का सफर किया है।*

 

*शिहाब के इरादे देखकर विदेश मंत्रालय भी चकराया*🤔

*विदेश मंत्रालय के अधिकारी हैरान रह गए जब उन्हें मक्का जाने की इजाजत के लिए शिहाब की दरख्वास्त मिली। पहले तो उन्हें यह नहीं पता था कि इस मसले को कैसे संभालना है ? क्योंकि उन्हें इससे पहले पैदल हज का कोई अनुभव नहीं था। आख़िर विदेश मंत्रालय ने शिहाब के पैदल सफर को हरी झंडी दे ही दी।*

 

*हज के लिए निकले शिहाब का मालाबार में कई जगहों पर हीरो की तरह स्वागत किया गया । जुम्मे को जब वह चलियाम पहुंचे तो सैकड़ों लोग उनका इस्तकबाल करने के लिए जमा हो गए। कई व्लॉगर्स उनकी यात्रा का प्रचार कर रहे हैं। क्योंकि शिहाब 21 वीं सदी में भारत से पैदल हज यात्रा करने वाले पहले इंसान हैं।*

 

*दिन में कम से कम 25 किमी चलने वाले का इरादे करने वाले शिहाब हल्का सामान ले जा रहे हैं ताकि सफर में दुश्वारी ना हो। उनका कहना है कि अंजान इलाकों का सफर तो हिंदुस्तान छोड़ने के बाद शुरू होगा। जो बेहद मुश्किल , जोखिम और तकलीफों से भरा होगा।*

 

 *शिहाब रातें मस्जिदों में बिताना पसंद करेंगे।*

 *“मैं कोई तम्बू नहीं ले जा रहा हूँ क्योंकि मैं दिन के उजाले में चलना चाहता हूँ। लेकिन मुझे बाद में एक तम्बू खरीदना होगा। ”उन्होंने बताया।*

 

*अगले साल फरवरी 2023 तक मक्का पहुंचने वाले शिहाब ने बताया कि इंशा अल्लाह , मैं आठ महीने में 8,640 किमी की दूरी तय करता हुआ मक्का पहुंच जाऊंगा।*

 

*अल्लाह से मेरी भी दुआ है*

*ऐसे नेक इरादे वाले लोगों की हिफाजत फरमाएं* 

*रब उन्हें अपने घर का दीदार नसीब फरमाए* 🕋

*इस पोस्ट को पढ़ने और इसे शेयर करने वालों को भी हज नसीब फरमाए*

*आमीन.......* 🕋

 
 

Hazrat muhammad sallallahu alaihi wasallam ka aakhri khutba

हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का आख़री ख़ुत्बा !

 

मैदान-ए-अरफ़ात(मक्काह) में 9 ज़िल्हिज्ज् ,10 हिजरी को मोहम्मद सल.अलैहि वसल्लम ने हज का आखरी ख़ुत्बा दिया था। बहुत अहम संदेश दिया था। गौर से पढे हर बात बार बार पढे सोचे कि कितना अहम संदेश दिया था 

 

1. ऐ लोगो ! सुनो, मुझे नही लगता के अगले साल मैं तुम्हारे दरमियान मौजूद रहूंगा , मेरी बातों को बहुत गौर से सुनो, और इनको उन लोगों तक पहुंचाओ जो यहां नही पहुंच सके !!

 

2. ऐ लोगों ! जिस तरह ये आज का दिन ये महीना और ये जगह इज़्ज़त ओ हुरमत वाले हैं, बिल्कुल उसी तरह दूसरे मुसलमानो की ज़िंदगी, इज़्ज़त और माल हुरमत वाले हैं। ( तुम उसको छेड़ नही सकते )

 

3. ज़ुबान की बुनियाद पर , रंग नस्ल की बुनियाद पर ताअसुब में मत पड़ जाना , काले को गोर पर और गोर को काले पर , अरबी को अजमी पर और अजमी को अरबी पर कोई फ़ौकीयत हासिल नहीं !!

लोगों के माल और अमानतें उनको वापस कर दो। 

 

4. किसी को तंग न करो, किसी का नुकसान न करो, ताकि तुम भी महफूज़ रहो। 

 

5. याद रखो, तुम्हे अल्लाह से मिलना है, और अल्लाह तुम से तुम्हारे आमाल के बारे में सवाल करेगा। 

 

6. अल्लाह ने सूद(ब्याज) को खत्म कर दिया, इसलिए आज से सारा सूद खत्म कर दो। (माफ कर दो )

 

7. तुम औरतों पर हक़ रखते हो, और वो तुम पर हक़ रखती है, जब वो अपने हुक़ूक़ पूरे कर रही हैं तो तुम भी उनकी सारी ज़िम्मेदारियाँ पूरी करो। 

 

8. औरतों के बारे में नरमी का रवय्या अख्तियार करो, क्योंकि वो तुम्हारी शराकत दार और बेलौस खिदमत गुज़ार रहती हैं। 

 

9. कभी ज़िना के करीब भी मत जाना

 

10. ऐ लोगों !! मेरी बात ग़ौर से सुनो, सिर्फ अल्लाह की इबादत करो, 5 फ़र्ज़ नमाज़ें पूरी रखो, रमज़ान के रोज़े रखो, और ज़कात अदा करते रहो, अगर इस्तेताअत हो तो हज करो।

 

11. हर मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है। तुम सब अल्लाह की नज़र में बराबर हो। बरतरी सिर्फ तक़वे की वजह से है। 

 

12. याद रखो ! तुम सब को एक दिन अल्लाह के सामने अपने आमाल की जवाबदेही के लिए हाज़िर होना है, खबरदार रहो ! मेरे बाद गुमराह न हो जाना। 

 

13. *याद रखना ! मेरे बाद कोई नबी नही आने वाला, न कोई नया दीन लाया जाएगा, मेरी बातें अच्छी तरह समझ लो।*

 

14. मैं तुम्हारे लिए दो चीजें छोड़ के जा रहा हूँ, क़ुरआन और मेरी सुन्नत, अगर तुमने उनकी पैरवी की तो कभी गुमराह नही होंगे। 

 

15. सुनो ! तुम लोग जो मौजूद हो, इस बात को अगले लोगों तक पहुंचाना, और वो फिर अगले लोगों तक पहुंचाए। और ये मुमकिन है के बाद वाले मेरी बात को पहले वालों से ज़्यादा बेहतर समझ ( और अमल ) कर सके। 

 

फिर आपने आसमान की तरफ चेहरा उठाया और कहा

16. *ऐ अल्लाह ! गवाह रहना, मैंने तेरा पैग़ाम तेरे बंदों तक पहुंचा दिया*

 

हम पर भी फ़र्ज़ है इस पैग़ाम को सुने, समझे, अमल करें और इसको आगे दुसरो तक भी भेजे ताकि अहम बाते सभी सीखे !!

 

(या रब इसको लिखने वाले, पढ़ने वाले ओर दुसरो तक़ पोहचाने वाले की हर परेशानि‍या दूर कर और उनको दुनिया ओर आख़िरत मे कामयाबी अता कर और तेरे सिवा किसी का मोहताज ना बना.... आमीन या रब) 

 

Reference ; ( सही अल-बुख़ारी, हदीस न. 1623 )

सहही मुस्लिम किताब 15, हदीस 159

 

हज से पहले पहले इस मेसेज को हर एक भाई बहन तक ज़रूर पहुँचाएँ।

 
 

Naat e paak Afzal Allahabadi

نعت پاک۔

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

دل مضطر تری توقیر بڑھا رکھی ہے

تجھ میں طیبہ کی تجلی جو بسا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

اے مریضو چلو آقا کے در اقدس پر

رب نے طیبہ کی فضاؤں میں شفا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

تاجور اس کی بلندی کو نہیں پا سکتے

جس نے نعلین تری سر پہ اٹھا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

تیرے ہونٹوں کے تبسّم کی ضیاباری سے

رب نے یہ محفل کونین سجا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

اس کے قدموں میں بچھی جاتی ہے ساری دنیا

جس نے بھی لو تری چوکھٹ سے لگا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

اپنے الطاف و کرم سے مری جھولی بھر دے

تیری رحمت سے بڑی آس لگا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

مجھ سا عاصی بھی معزز ہے زمانے بھر میں

تیری رحمت نے مری لاج بچا رکھی ہے

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

دیکھ کر گنبد خضریٰ کی بلندی افضل

آسماں نے بھی جبیں اپنی جھکا رکھی ہے

 

              افضل الہ آبادی

 
 

Khubsurat Ghazal Saqib Lakheempuri

۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔غزل۔۔۔۔۔۔

 

بنے وہ رشتہ کہ جس میں سدا نباہ نہ ہو

کبھی بھی مجھ سے،خدا میرے،یہ گناہ نہ ہو

 

چھلک پڑے نہ جو پل میں بھلا وہ آنکھ ہی کیا

وہ لب ہی کیا کہ کبھی جن پہ سرد آہ نہ ہو

 

میں چاہتاہوں تمہیں عشق کا مرض نہ لگے

میں چاہتاہوں نٸے لڑکو! تم تباہ نہ ہو

 

ابھی ہمارے چراغوں میں دم سلامت ہے

اتاٶلی تو ابھی سے شبِ سیاہ! نہ ہو

 

اجازت اس کی نہیں دیتا ہے مرا کلچر

سو میرا تذکرہِٕ عشق گاہ گاہ نہ ہو

 

کہیں خدا نہ سمجھنے لگیں یہ خود کو،میاں!

سو احترام ہو ان کا ، پہ بے پناہ نہ ہو

 

عزیز تر ہیں مجھے یہ چراغ ہی ثاقب

سو محفلوں میں مری ذکر مہر وماہ نہ ہو

 

ثاقب ندیم لکھیم پوری

 
 

Hamare nabi ki taleem / udaipur rajasthan murder islam ki roshni me / islam kya sikhata hai

हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) के अपने मिशन में कामयाब होने की वजह अगर कोई मालूम करना चाहे तो वो है "नर्मी"

इसकी गवाही ख़ुद अल्लाह ने दी है, फ़रमाया:

(ऐ नबी!) ये तुम्हारे साथ अल्लाह की ख़ास रहमत है कि तुम 'नर्म मिज़ाज हो', (अगर ऐसा न होता यानी) अगर आप 'सख़्त दिल' और 'सख़्त मिज़ाज' होते तो जो लोग आपसे चिमटे हुए हैं वो सब आपके क़रीब से छँट जाते। इसलिए (इस ख़ूबी को और परवान चढ़ाओ और इसी रविश पर क़ायम रहते हुए) इनकी ग़लतियों से दरगुज़र करते रहो और इनके लिये बख़्शिश की दुआ करते रहो।" (क़ुरआन 3 : 160)

ख़ुद रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया 

"अल्लाह ख़ुद नर्म है और नरमी को पसन्द करता है। और नरमी पर वो कुछ अता करता है जो किसी और चीज़ पर अता नहीं करता" (हदीस मुस्लिम :6601)

 

हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) की पूरी ज़िन्दगी की तालीमात और अमल का अगर कोई निचोड़ मालूम करे तो वो है "अफ़्व" (यानी माफ़ी और दरगुज़र से काम लेना)

इसकी मिसालें रसूलुल्लाह (सल्ल०) की ज़िन्दगी में भरी पड़ी हैं। आपकी प्यारी बीवी हज़रत आयशा (रज़ि०) फ़रमाती हैं कि आपने अपनी ज़ाती ग़रज़ के लिये कभी किसी से इन्तिक़ाम नहीं लिया। (हदीस मुस्लिम 6045, 6050)

मौक़ा आने पर अपने बड़े से बड़े दुश्मन को भी माफ़ कर दिया। 

अबू-जहल आप (सल्ल०) का सबसे बड़ा दुश्मन था। उसकी मौत के बाद उसका बेटा इकरिमा दुश्मनी पर उतर आया और दुश्मनी में अपने बाप से भी आगे बढ़ गया। जब मक्का फ़तह हुआ तो इकरिमा को ख़ुद यक़ीन नहीं कि जिस तरह की तकलीफ़ें रसूलुल्लाह (सल्ल०) को पहुँचाई थीं उनके चलते उनको माफ़ कर दिया जाएगा। इसी डर से वो मक्का छोड़कर भाग गया। फ़तह के बाद रसूलुल्लाह ने जब आम माफ़ी का ऐलान किया तो इकरिमा की बीवी रसूलुल्लाह के पास गई और माफ़ी की दरख़ास्त की तो रसूलुल्लाह ने माफ़ कर दिया। बीवी ने जब ये ख़बर अपने शौहर को जाकर सुनाई तो उसे ख़ुद यक़ीन नहीं हो रहा था। बहरहाल वो वापस आया और इस्लाम क़बूल किया। 

 

रसूलुल्लाह (सल्ल०) की तमाम तालीमात को अगर एक जुमले में समेटा जाए तो वो है "तमाम इन्सानों से मुहब्बत और समाज में सलामती (Peace) क़ायम करना"

 

फिर ये कैसे हो सकता है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने तो कभी इन्तिक़ाम न लिया हो लेकिन रसूल को मानने का दावा करने वाले लोग इन्तिक़ामी कार्रवाई करने लगें?

ये कैसे मुमकिन है कि रसूल तो 'ताइफ़' में गालियाँ सुनने और लहूलुहान होने के बाद भी सबको माफ़ कर दें लेकिन उनके माननेवाले उनकी तौहीन पर इतने बेक़ाबू हो जाएँ कि किसी की जान ले लें?

 

क्या वो क़ुरआन की उस तालीम को भूल जाते हैं कि-

"(लोगों के साथ) माफ़ी का मामला इख़्तियार कीजिये और लोगों के साथ भलाई का मामला करते रहिये और ग़फ़लत में पड़े लोगों से न उलझिये।" (आराफ़ : 199)

और ये कि-

"नेकी और भलाई कभी बदी और बुराई के बराबर नहीं हो सकती। (तुम्हारा रवैया ये होना चाहिये कि हमेशा) बुराई का बदला बेहतरीन भलाई से दो। अगर तुम ऐसा करोगे तो तुम्हारे दुश्मन भी तुम्हारे गहरे दोस्त हो जाएँगे। (41 : 34)

 

याद रखिये! इस्लाम इसलिये नहीं आया कि इसके मानने वाले तमाम लोगों को नबी का एहतिराम करनेवाला बना दें, बल्कि इस्लाम इसलिये आया है कि हम अपने अमल से अपने समाज में सलामती क़ायम करके दिखाएँ।

ख़ुदा और रसूल की तरफ़ से लानत है ऐसे लोगों पर कि जो रसूल से मुहब्बत का दावा करते हों और अपने अमल से ये साबित करते हों कि वो इंसानियत के दुश्मन हैं। 

तमाम इन्सानों और सच्चे मोमिनों की तरफ़ से लानत है उन लोगों पर कि जो उस जान को क़त्ल कर डालें जिसे अल्लाह ने बा-इज़्ज़त और क़ाबिले-क़द्र बनाया है (याद रखना चाहिये कि हर इन्सानी जान को अल्लाह ने मोहतरम और क़ाबिले-इज़्ज़त ठहराया है। देखें क़ुरआन 17 :70) 

 

लिहाज़ा किसी भी तरह के इन्तिक़ाम के जज़्बे से किसी इंसान की जान हरगिज़ नहीं ली जा सकती। जो ऐसा करे वो इन्सानियत का दुश्मन है और ऐसा शख़्स जो भी हो मगर वो मुसलमान हरगिज़ नहीं हो सकता।

 
 

Ghazal / Urdu Poetry / Urdu Nazam / Saqib Lakheempuri / Saqib Qari Sahab / The Halima Urdu Shayari

غزل

 

قلم غلام ہے زباں غلام ہے

منافقوں کاجسم وجاں غلام ہے

 

ستم رسیدہ لوگ دیں کسےصدا

جوعدل کا ہے پاسباں،غلام ہے

 

ہم ایسےبدنصیب لشکری ہیں،آہ

ہمارا میرِکارواں۔۔ ۔۔۔غلام ہے

 

کوٸی اثر ہو کس طرح کہ غافلو!

تمہاری آہِ ناتواں ۔۔۔۔۔۔۔۔غلام ہے

 

مقابلہ کرے عدو کا کیسے وہ

کہ اس کاخنجرو سناں غلام ہے

 

لہو لہو ہے دل یہ سوچ کر کہ آہ

ہماری نسلِ نوجواں غلام ہے

 

عداوتیں یہ مسٸلوں کاحل نہیں

محبتوں کایہ جہاں غلام ہے

 

تمہیں ہےثاقب ان سےآسِ انقلاب

کہ جن کی فکرِ ترجماں غلام ہے

 

 

ثاقب ندیم لکھیم پوری

 
 

मुंबई में मदरसे के बच्चों ने किया SSC exam clear

मुंबई के एक मदरसे जामिया तजवीद उल क़ुरान से फ़ारिग़ 22 हाफ़िज़ बच्चो ने SSC एक्जाम क्लियर कर इतिहास रच दिया है। इन 22 हाफिज़ो में 14 ने Distinction प्राप्त की है जबकि बाकी 8 ने 60% से ऊपर मार्क हासिल किए हैं।

 

इन बच्चो की सफलता के पीछे स्थानीय बिज़नेस मैन मोहम्मद अली भाई की मेहनत और कोशिशें हैं,अली भाई ने 2000 में बंग्ले को शिक्षण संस्थान के रूप में बदल दिया था यहां मदरसा और स्कूल साथ साथ चलते हैं मदरसे के पहले बैच मे 2011 में 13 हाफिज़ो ने SSC एक्ज़ाम क्लियर किया था पिछले एक दशक में यहां के 97 हाफिज़ो ने SSC एक्जा़म क्लियर किया है। इसके साथ कई हाफ़िज़ इंजीनियर डॉक्टर और फार्मासिस्ट भी हैं।

 
 

YouTube Channel Monetization ki kya policies hain / Kis tarah ke channel monetize hote hain

Reused content:

Why YouTube channel is not monetized?

 

Do

Examples of what is allowed to monetize

A funny or thoughtful revision of content you didn't originally create.

 

Clips of others people's content as part of a critical review.

 

A scene from a movie where you've re-written the dialogue and changed the voiceover.

 

Replays of a sports tournament where you explain what a competitor did to succeed or fail.

 

Reaction videos where you comment on the original video.

 

Edited footage from other creators where you add a storyline or commentary.

 

Don't

 

Examples of what is not allowed to monetize.

 

Short videos you compiled from other social media websites.

 

Collections of songs from different artists (even if you have their permission).

 

Clips of moments from your favorite show edited together with little or no narrative.

 

Content uploaded many times by other creators.

 

Promotion of other people's content (even if you have their permission).

 

 

 
 

UP Board High School Result 2022 / Sarkari Result 2022 / UP Board ka Result Kab aa raha hai

UP Board Result 2022 Date and Time Live News and Updates: यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 डेट की घोषणा जल्द होने वाली है. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड UPMSP 10th, 12th Results 2022 ऑफिशियल वेबसाइट upresults.nic.in पर जारी करेगा।

 

यूपी बोर्ड क्लास 10, 12 रिजल्ट 2022 ऑफिशियल वेबसाइट के अलावा अन्य वेबसाइट्स पर भी जारी किया जाएगा. इन वेबसाइट्स पर नजर बनाए रखें-

 

upmsp.edu.in

 

upresults.nic.in

 

results.upmsp.edu.in

 

results.gov.in

 

https://upmsp.edu.in/

 

यूपी बोर्ड रिजल्ट 10th 12th 2022 कब जारी किए जाएंगे? यूपीएमएसपी रिजल्ट डेट 2022 की घोषणा आज, बुधवार 15 जून को की जा सकती है।

 

UP 10th, 12th Result 2022 Date: खत्म होने वाला है इंतजार। शिक्षा मंत्री द्वारा दी गई सूचना के अनुसार 15 जून यानी कल के बाद कभी भी यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं परिणाम 2022 की घोषणा की जा सकती है. ऐसे में पूरी संभावना है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् रिजल्ट डेट की घोषणा कल कर दे।

 
 

Saudi Ka Mekka City / Prophet Muhammad SAW ki shaan / Islamic Country Saudi Arabia Makka city Specia

"सऊदी अरब का मक्का शहर" 

 

No.1 ... सऊदी में पट्रोल डीजल तेल पैदा होता है और सोने GOLD के पहाड़ है !

 

No.2... मक्का दुनियां का एक अकेला एेसा शहर है ज़हां बाजार मार्किट सब कुछ 24 घण्टे रात दिन खुला रहता है !

 

No.3... यहा ज्यादातर खरीददारी ओरतें ही करती है.. मगर पर्दे में रह कर.. फिर भी कभी यहा बलात्कार या छोटी मोटी छेड़छाड़ जैसी घटना भी नहीं होती है यहा रात दिन औरतें अकेले बिना डर खौफ कहीं भी आ जा सकती है!

 

No.4...मक्का शहर का कूड़ा कचरा शहर से 70 KM .दूर पहाड़ियो में दबाया जाता है .दुनियां का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल होने के बावजूद एक साथ लाखो हज य़ात्री आते है .उसके बाद भी मक्का साफ सफाई में दुनिया का न.1 शहर है !

 

No.5...मक्का पूरा पथरीला रेगिस्थान शहर होने के बावजूद यहां की जमीन में पानी की एक बूँद नहीं है फिर भी अल्लाह की कुदरत से ज़मज़म के एक कुएे से पुरे साल और पूरी दुनिया में ज़मज़म का पानी जाता है और यहा भी पूरे मक्का और सऊदी में प्रयोग किया जाता है और आज तक कभी कम नहीं हुआ है.....सुब्हान अल्लाह ज़मज़म का पानी कभी खराब नहीं होता .ज़मज़म के पानी में अल्लाह ने शिफा रखी है !

 

No.6...यहा हजारो तरह के खाने पकते है क्योकि मक्का सिर्फ दुनिया का एक एेसा शहर है जहा दुनिया के हर कोने से हर जगह से लाखो मुसलमान ईकट्ठा होते है!

 

No.7...मक्का शहर में एक दिन में लाखो मुर्गिया व बकरो अन्य गोस्त की खपत होती है..

 

No.8...यहा की छाछ ज़िसका नाम (LEBAN) है वो full fat की होती है जैसा भारत का का दूध !

 

No.9...सऊदी और मक्का में लाखों भारतीय ..पकिस्तानी ..बंगलादेशी ...मिस्री..यमन ...और लाखो व अन्य देशो के लोग काम करते है सोचो अल्लाह यहा से कितने लोगो के घर चला रहा है !

 

No.10...मक्का शहर में लाखो AC इस्तेमाल होते है क्योकि यहा हर कमरे में यहा तक के छोटी-सी-छोटी दुकान में भी AC लगा होता है!

 

No.11...यहा पर 6 और 8 सिलेन्डरो तक की कारे दोड़ती है !

 

No.12...यहा खजूर के सिवाय कोई फसल नहीं उगती फिर भी दुनिया की हर चीज फल सब्जी वगैरह बेमौसम यहा पर बिकती है ...मक्का में 200 क्वालिटी की खजूर बिकती है और एक एेसी खजूर भी है उसमे गुठंली भी नहीं है !

 

No.13...पूरे सऊदी अरब में कोई नदी या तालाब नहीं फिर भी मक्का और सऊदी में पानी की कोई कमी नहीं है !

 

No.14...मक्का में कोई बिजली लाइंन बाहर नहीं है सब ज़मीन के अन्दर है !

 

No.15...पूरे मक्का में कोई नाला या नाली नहीं है !

 

No.16...पूरा मक्का शहर पहाड़ी इलाके में है फिर भी रोड़ 4 लाइंन .6 लाइंन .8 लाइंन .10 लाइंन और .12 लाइंन तक की सड़कें है और पहाड़ो के अन्दर जो सुरंगे बनी हुई है वो भी 6 लाइंन .8 लाइंन है !

 

No.17... दुनिया का सर्वश्रेस्ठ कपड़ा यहा बिकता है जबकी यहा बनता नहीं है!

 

No.18...यहा की सरकार हर पढ़ने वाले बच्चे को 600 से 800 रियाल प्रतिमाह देती है जो इंडिया के 12 से 16 हजार रूपये होता है!

 

No.19...यहा विकास कार्य के लिये जो पैसा हुकूमत से मिलता है वो पूरा का पूरा खर्च किया जाता है !

 

No.20...यहां मुख्यतया जैतून, सुरजमुखी और मक्का (मकी -कुकड़ी) का तेल खाया जाता है !

 

No.21... यहा का कानून दुनिया का सर्वोत्तम इंसाफ करने वाला कानून है यहा चोरी ..लूट ..हत्या ..अपरहण.. जैसे कोई अपराध नहीं है !

 

No.22... यहा हरयाली नहीं ..पेड़ पौधे नहीं के बराबर है मग़र सांस लेने में कोई तकलीफ नहीं होती है यहा पर वैज्ञानिक रिसर्च भी फैल है !

 

No.23... यहा हर चीज बाहर से मगायी जाती है फिर भी महंगाई नहीं है ...!!!!!                                                                         

 

 सुब्हान अल्लाह!!Ye Hai Mere Nabi Ki Karamat

 

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Mard par Aurat Bhari aur Haavi hai / A True Story of a man and woman / the Halima article

*مرد پر عورت بھاری اور حاوی ہے*

 

..ثاقب ندیم لکھیم پوری

8077653596

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مردوعورت نظام زندگی کےدوپہٸےہیں، ان میں سےکسی ایک کےبغیر زندگی ناقص اور ادھوری سی لگتی ہے، نظام حیات کی روانی اورنسل انسانی کےتسلسل کےلٸے مرد عورت کامربوط ہونا اور ایک دوسرےسےمتعلق ہوناضروری ہے، قدرت نے مردعورت کو ایک دوسرےکی تسیکن وضرورت کاسامان اور ایک دوسرےکاغمخوار بنایاہے،مردعورت دونوں کاوجود سینہٕ گیتی پر پرلازم وملزوم کےمانندہے، دونوں ہی ایک دوسرےکی شناخت کاذریعہ ہیں،دونوں اصناف ایک دوسرے سےاس طرح مربوط ہیں کہ اتناربط وتعلق کسی اور مخلوق میں نہیں ہے،مرد اگر پھول ہے توعورت اس کی خوشبوہے، مرداگر چاند ہے تو عورت اس کی چاندنی ہے، مرد اگرشمع ہے تو عورت اس کی روشنی ہے، مرد اگرسایہ ہے توعورت اسکی ٹھنڈک ہے، مرد اگر جسم ہے تو عورت اس میں دوڑنےوالا لہوہے، مرد اگر دل ہےتو عورت اسکی دھڑکن ہے، الغرض مردوعورت کا وجود کسی ایک کے بغیر ناقص وناکمل سالگتاہے،ان تمام روابط وتعلقات کےساتھ ساتھ مردوعورت کے درجات میں فرق ہے،مردکو عورت پرفوقیت بخشی گٸی ہے،مرد کامل العقل اور عورت کوناقص العقل بتلایاگیاہے،مرد کوقوام اور عورت کو اسکاماتحت بنایاگیاہے،مرد کوعورت کےمقابلےمیں مضبوط وتوانا ماناجاتاہے، عوت کے مقابلےمیں مردکوبہت زیادہ ذمہ داریوں کاحامل بنایاگیاہے، تدبرو تفکر، طاقت وقوت، عقل وخرد، سوجھ بوجھ، صبر وضبط وغیرہ میں مرد کوعورت پر تفاوق وبرتری حاصل ہے، الغرض یہ کہ بہت سی وجوہات کی بنا پر مرد عورت پرفاٸق ہے، مگر ان تمام قسموں کے تفاوق وبرتری کے باوجود صنف نازک یعنی عورت مرد پر حاوی ہے، مرد کمزور عورت طاقتور ہے، عورت حاکم مرد محکوم ہے، مرد کو عورت اپنی مٹھی میں رکھتی ہے، مرد کو عورت اپنی انگلیوں پر نچاتی پھرتی ہے، مرد تابع عورت متبوع نظر آتی ہے،عورت کےاندر قدرت نے وہ کشش وہ صلاحیت رکھی ہے کہ مرد اس کاغلام بن جاتاہے، مرد کو اپنےطلسم میں عورت ایسے گرفتار کرتی ہے کہ وہ اپنی تمام برتری وفضیلت کو بھول جاتاہے،عورت مرد پر ایسا جادو چلاتی ہےکہ وہ خود قوام اور مرد ماتحت بن جاتاہے، خدا نے عورت کے اندر وہ طاقت رکھی ہےکہ اس کےسامنے پتھر دل مرد آن کی آن میں موم کی طرح پگھل جاتاہے، عورت اپنی ایک ادا سے مردکےبرسہابرس کے مجاھدے اور سیکڑوں راتوں کی ریاضت پر پانی پھیردیتی ہے، زندگی کےہر شعبہ میں فتح کاپرچم لہرانےوالےمرد پر عورت ایساحملہ کرتی ہےکہ وہ ایک لمحےمیں سب کچھ ہار بیٹھتاہے، خودکودنیاٸے عقل وخرد کابادشاہ سمجھنے والامرد عورت کےدام فریب میں ایساالجھتاہے کہ جنون ودیوانگی اس کامقدر بن جاتی ہے، ہر قسم کےقید وبند سے آزاد مرد عورت کےزلفوں کاایسا اسیر ہوتاہے کہ تاحیات اس سے رہاٸی غیرممکن ہوجاتی ہے،ظاہراً مضبوط وتوانا، قوی الہیکل مرد عورت کے کسی ایک جملے سے ایساٹوٹتاہےکہ اس کاپورا وجود شیشےکی طرح بکھرکر ریزہ ریزہ ہوجاتاہے، صبروضبط تحمل وبرداشت کا پتلایہ مرد عورت کے کسی غیر متوقع رویہ سے ایسا مبہوت وپریشان ہوتاہےکہ راتوں کی نیند دل کا سکون اس کامکدر ہوجاتاہے،ہشاش بشاش دکھنے والا مرد جب عورت کے چنگل میں پھنستاہے تو چھپ چھپ کےروتاپھرتاہے، سارے زمانے سےلڑنےکاعزم رکھنے والامرد عورت کےسامنے بزدل وکم ہمت بن جاتاہے،ثابت قدمی اور پاٸندگی کادعوی کرنے والا مرد عورت کے اک اشارے پر ایسا ڈگمگاتااور متزلزل ہوتاہے کہ تاعمر سنبھل نہیں پاتاہے، عورت کےحسن کاجادو مرد کوایسا مسحور کرتاہے کہ زمانے کے عاملین عاجز آجاتے ہیں، دنیاکے توپ وتفنگ،تیغ وسناں سے محفوظ مرد عورت کی نگاہ ناز سے ایسا قتل ہوتاہے کہ پانی بھی نہیں مانگ پاتاہے، خودداری میں مست اور اناوغرور کےنشہ میں چور مرد کو عورت بڑی آسانی سے اپنےہاتھوں کاکھلونابنالیتی ہے، عزت وشہرت ،سوجھ بوجھ، دور رس نگاہ کےمالک مردکی آنکھوں پر عورت جب عشق ومحبت کی پٹی باندھتی ہے تو وہ بالکل اندھا اور انجام سے بےبہرہ ہوجاتاہے،اپنی عزت وشہرت کو بصد شوق خاک میں ملادیتاہے، سو عورت مرد پر پوری طرح قابض ہے، عورت چاہے تو بےسروسامانی کےعالم میں بھی مرد کو بادشاہ بنادےاور عورت چاہے تو دنیابھر کامال ومتاع سازومان ہونےکےباوجود مرد کومسکین وبےبس، کمزور وبیچارہ بنادے،عورت چاہےتو مرد کی بوسیدہ کٹیاکو جنت کانشاں بنادے، عورت چاہےتو مردکےقصرابیض اور باغ ارم کوجہنم بنادے، عورت چاہےتو مرد کی عیش وعشرت سکون وراحت بھری زندگی عذاب بنادے، عورت چاہےتو غم وآلام، حزن وملال کےمنجدھار میں پنھسےہوٸے مرد کو سروروانبساط فرحت وشادمانی کے ساحل پر لاکر کھڑاکردے، عورت چاہے تو خوش وخرم، فرحاں وشاداں، ہنستے کھیلتے مرد کواپنی چندتلخ باتوں سے بیمارکردے، عورت چاہے تو تھکے ماندے، پژمردہ اور کمھلاٸے ہوٸے مردکو پیارکےایک بول سے تروتازہ کردے، بہرحال ان تمام باتوں سے یہی سمجھ میں آتاہےکہ مرد کےنفس نفس پرعورت کی حکومت ہے، مرد کی رگ رگ پر عورت قابض ہے، مرد کی باگ ڈور عورت کےہاتھوں میں ہے، مرد کی طاقتور شخصیت نازک براندام عورت کی غلام ہے، مردپر عورت حاوی ہے جی ہاں حاوی ہے۔

 
 

PUBG game khelne se mana kiya to ladke ne apni mother ko hi maar diya / the Halima news

मेरे प्यारे दोस्तों,

 

आज मैं इस post में आपसे एक बहुत ही ज़रूरी मसले पर बात करने जा रहा हूं। और ये कोई छोटा सा मसला नहीं बल्कि बहुत बड़ा मसला है।

 

देखिए आज हम इस hi-tech दुनिया में अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। तो हमें अपने बच्चों की ज़रा भी परवाह नहीं कि उनका क्या हो रहा है और वो किस तरह ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। आज हमारे बच्चे शिक्षा तो हासिल कर रहे हैं लेकिन ये ऐसी शिक्षा हासिल कर रहे हैं जिसमें मां और बाप की कोई इज़्ज़त नहीं है, कोई मर्तबा नहीं है। 

 

अफसोस होता है ऐसी शिक्षा पर कि बहुत मोटी रकम बच्चे पर खर्च की जाती है लेकिन शिक्षा उसकी ऐसी होती है कि जैसे ही वह बड़ा होता है तो सबसे पहले वो अपने करीबियों को भूल जाता है। होता इसलिए है क्योंकि जब बच्चा छोटा होता है तो मां बाप उसको अपने से दूर रखते हैं या किसी play school में डाल देते हैं। 

 

बच्चे को मां बाप का प्यार नहीं मिलता है। और इसका नतीजा यह होता है कि बच्चा बड़ा होकर अपने मां बाप की बिल्कुल भी परवाह नहीं करता। इसमें गलती बच्चे से ज़्यादा मां बाप की है, क्योंकि जब बच्चा छोटा था तो मां बाप ने उसको अपने पास क्यों नहीं रखा, उसके लिए समय क्यों नहीं निकला, उसको मां बाप और बड़ों की अहमियत क्यों नहीं बताई।

 

अब तो हाल यह हो गया है कि जब से mobile बच्चों के हाथ में आए हैं, तब से बच्चा और भी ज़्यादा बिगड़ता जा रहा है। क्योंकि एक तो मां बाप के पास उसके लिए समय नहीं होता और दूसरे यह कि मोबाईल पर बच्चे adult content भी देख रहे हैं। और नतीजा यह कि बच्चे समय से पहले बड़े हो रहे हैं। 

 

बच्चा online games में इतना लग गया है कि बहुत सी जगहों पर देखने को मिलता है कि पूरा दिन बच्चे अपना समय games खेलने में लगा देते हैं। Pubg और free fire जैसे games ने तो लोगों का सुकून छीन लिया है क्योंकि आपने news में और अख़बारों में सुना और पढ़ा होगा कि बच्चों ने अपने मां बाप के कई कई हज़ार रुपए games में खर्च कर दिए। 

 

और तो और इससे भी खतरनाक मामला यह है कि कई जगह पर बच्चों ने अपने ही मां बाप के साथ मारपीट की और कई बार तो मैने यह ख़बर भी पढ़ी है कि बच्चे ने मां से या बाप से पैसे मांगे या mobile मांगा और मां ने या बाप ने मना किया तो बच्चे ने मौका देखकर अपने मां बाप को ही मौत के घाट उतार दिया।

 

अभी कुछ दिन पहले ही मैंने एक खबर पढ़ी कि बच्चा pubg खेल रहा था मां ने कुछ दिया या डांट दिया तो बच्चे ने अपनी मां को ही जान से मार दिया।

 

मेरे प्यारे दोस्तों, भाईयों, मांओं और बहनों, इस Post को लिखने का एक बड़ा मक़सद यही है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपकी बात माने और बड़ा होकर आपकी इज़्ज़त करे तो आज ही से अपने बच्चों का ध्यान रखें और जितना हो सके उन्हें mobile पर ऑनलाइन games खेलने से रोकें। और उनको अच्छी जगह शिक्षा दिलाएं। फिर देखना कि बच्चा आपको ऐसी इज़्ज़त देगा कि आप खुश हो जायेंगे।

 

बच्चों पर यह भी निगरानी करें कि वो किन बच्चों के साथ रहता है, खेलता है। मतलब कहने का यह है कि बच्चों को अच्छी society दें। बच्चों को बड़ों की अहमियत बताएं।

मैं चाहता हूं कि हर बच्चा अपना और अपने मां बाप का सही से ख्याल रखे। हमारे बड़े खुश रहेंगे तभी तो हमें दुआयें मिलेंगी।

 

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UP Board High School Result 2022 / Sarkari Result 2022 / UP Board ka Result Kab aa raha hai

UP Board 10th and 12th का रिज़ल्ट कब आएगा?

 

प्यारे बच्चों, बस अपने अल्लाह से, ईश्वर से, खुदा से दुआ में ये मांगों कि ईश्वर बेहतरीन मार्क्स से पास करा दे।

क्योंकि आपको अब और ज़्यादा इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है।

 

UP board 10वीं result kab ayega: यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अभी तक यूपी बोर्ड रिजल्ट की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि नतीजे इस सप्ताह कभी भी आ सकते हैं।

 

UP Board 10th, 12th Result 2022:यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम इस सप्ताह में आएगा। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट 9 जून 2022 के बाद कभी भी जारी कर दिया जाएगा । रिजल्ट जारी करने को लेकर बोर्ड ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बोर्ड पूरी तरह से रिजल्ट 9 जून के बाद जारी कर देगा। आपको बता दें कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा करने के बाद ब्योरा बोर्ड मुख्यालय को भेज दिया गया है। रिजल्ट का काम पूरा हो गया है। आपको बता दें कि सभी केंद्रों ने कॉपी चेकिंग के बाद बोर्ड मुख्यालय को नंबर भेज दिए गए हैं।

 

इस साल यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए 52 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया है। यूपी बोर्ड के नतीजे आपको upmsp.edu.in के साथ लाइव हिंदुस्तान या अमर उजाला की website पर भी देखने को मिलेंगे। इसके लिए आपको इस पेज पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा, यहां आप नतीजे चेक कर सकेंगे। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद नतीजे जारी होने पर आप इसी लिंक पर क्लिक कर नतीजे चेक कर सकेंगे।

 

सभी के लिए दिल से यही दुआ है कि आप सभी इस बार अच्छे अंकों से पास हों।

 

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Metro Hospital Joya Road Amroha / Dr Bilal Turki / Gareebo Ka Hospital /

कल अमरोहा जिले की मशहूर शख्सियत DrBilal Turki से दोस्त #डाक्टर Faizan Sameer के साथ उनके हॉस्पिटल में मुलाकात हुई

 डॉक्टर साहब बहुत ही नेक इंसान है उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई

 डॉक्टर साहब की खासियत उनके हॉस्पिटल में जो गरीब तबके के लोग इलाज के लिए आते हैं उनका बहुत ही ख्याल रखते हैं

 अल्लाह ताला ने डॉक्टर साहब को बहुत अच्छी तरबियत से नवाजा है डॉक्टर साहब ने बहुत ही कम उम्र में बङा नाम कमाया है 

अमरोहा रोड पर स्थित मेट्रो हॉस्पिटल बहुत अच्छी तरक्की कर रहा है क्षेत्र के लोग वहा जाकर कम पैसों में इलाज करा कर फायदा उठा रहे हैं

 हॉस्पिटल बहुत ही खूबसूरत और सारी सुविधाओं से लैस है

 मेरी तो अल्लाह से यही दुआ है डॉक्टर साहब कामयाबी की और उचि बुलंदी पर पहुंचे और लोगों की यूं ही सेवा करते रहे

 
 

Teachers

John Advert

English Professor

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"Education is the most powerful weapon which you can use to change the world” – Nelson Mandela.